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कुल्वी रीति-रिवाज़ (1910)

मकान बनाने के लिए पत्थरों की चिनाई की जाती है जिनमें नियमित अंतराल पर केळू (देवदार) लकड़ी के शहतीर लगाए जाते हैं। दीवार में लंबाई और आड़े में पीछे से आगे लगे शहतीर या ‛चेउळ’ लोहे या लकड़ी के पेंच से जोड़े जाते हैं। इस तरह पूरी दीवार ऐसे बंधी रहती है मानो एक ही शीलाखण्ड हो और एक तेज़ भूकंप को झेल सकती है। कमोबेश इसी कारण भवन-निर्माण की यह विधि पहले-पहल अपनाई गई होगी

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