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कुल्लू व सराज के ‘ठाकुर’ और ‘राणा’ (1907-10)

पारशा ठाकुरों के पुरखे कांगड़ा से आए थे। उन्हें सुकेत के राजा ने ‘रूपी’ का वज़ीर नियुक्त किया था, जब रूपी सुकेत के अधीन थी। पारशा व कोट चुनेर के ठाकुरों को हौवेल ने ‘एक’ कहा है।

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